उच्च न्यायालय मध्यस्थता एवं सुलह केन्द्र एवं उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा “राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान-2.0” प्रारम्भ
लखनऊ: उच्च न्यायालय मध्यस्थता एवं सुलह केन्द्र तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में “राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान-2.0” का शुभारम्भ 02 जनवरी 2026 से किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का आपसी सहमति एवं संवाद के माध्यम से शीघ्र, सरल एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।अभियान के अंतर्गत वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, वाणिज्यिक एवं सेवा विवाद, शमनीय आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, बंटवारा, बेदखली, भूमि अधिग्रहण तथा अन्य उपयुक्त सिविल मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारित किया जा सकता है।
सदस्य सचिव राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण मनु कालिया ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बताया गया कि जिन वादों में पक्षकार आपसी समझौते के इच्छुक हैं, वे अपने संबंधित न्यायालय में मध्यस्थता हेतु अनुरोध कर सकते हैं। तहसील एवं जनपद स्तर पर लंबित मामलों के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों में सप्ताह के सातों दिन मध्यस्थता कार्यवाही आयोजित की जा रही है।
मध्यस्थता की प्रक्रिया प्रशिक्षित एवं दक्ष मध्यस्थों द्वारा संपादित कराई जाती है तथा यह पक्षकारों की सुविधा के अनुसार ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित की जा सकती है। मध्यस्थता सफल होने की स्थिति में पक्षकारों द्वारा तय शर्तों के अनुसार न्यायालय में लंबित वाद का निस्तारण किया जाता है, जबकि असफल होने पर मुकदमे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और समय, धन व मानसिक तनाव की बचत करते हुए सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।
अधिक जानकारी के लिए नागरिक अपने निकटतम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अथवा तहसील विधिक सेवा समिति से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त टोल फ्री नंबर 1800-419-0234 एवं 15100 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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