By :
Nishpaksh Pratinidhi
| Published Date :
8
Jan
2026
7:10 PM
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वर्तमान माह जनवरी में ठंड अपना रंग दिखा रहा है। कहा जाता है माघ का ठूसारा । जनवरी के मौसम में रबी फसलों गेहूं, चना, सरसों के लिए ठंड अनुकूल होती है, लेकिन पाला, कोहरा और माहू कीट फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। पाले से बचाव के लिए सिंचाई और धुएं का प्रयोग करें, जबकि कीटों के लिए उचित प्रबंधन आवश्यक है। इस समय फसलों की वृद्धि और सिंचाई महत्वपूर्ण होती है, जिससे बेहतर पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है।
प्रसार्ड ट्रस्ट मल्हनी देवरिया के निदेशक प्रोफेसर रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि इस समय अधिक ठंड के कारण मानव, पशु-पक्षी पेड़ -पौधे, एवं फसलों पर अधिक प्रभाव पड़ रहा है। पेड़ो में नीम, तुलसी की पौधे सुख रहे है। इस मौसम का फसलों पर सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रभाव पड़ता है।
सकारात्मक प्रभाव देखा जाय तो रबी फसलों के लिए ठंड और नमी का मौसम उनकी अनुकूल वृद्धि के लिए अच्छा होता है, खासकर गेहूं में कल्ले निकलने और जड़ बनने की अवस्था के लिए।अनुकूल मौसम, उचित सिंचाई और पोषण से गेहूं और सरसों जैसी फसलों की पैदावार अच्छी हो सकती है इस महीने में मूली और बैंगन जैसी सब्जियों की खेती से अच्छा मुनाफा होता है, क्योंकि ठंड इनके लिए उपयुक्त है और बाजार में मांग अधिक होती है।
नकारात्मक प्रभाव में तापमान 4° से.ग्रे. से नीचे गिरने पर पाला पड़ने का खतरा होता है, जो फसलों की पत्तियों और फूलों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे उत्पादन घटता है। हल्की ठंड और नमी के कारण माँहू कीट, सफेद रस्ट और तना गलन रोग बढ़ सकते हैं, खासकर सरसों और गेहूं की फसलें प्रभावित होती है। कम धूप और घने कोहरे से भी फसलों की वृद्धि प्रभावित होती है और बीमारियों के फैलने का खतरा ज्यादा रहता हैं।
फसलों पर नकारात्मक प्रभाव से बचाव और प्रबंधन के लिए –
गेहूं में जड़ और कल्ले निकलने की अवस्था में सिंचाई जरूरी है, पाले से बचाने के लिए शाम के समय सिंचाई करें।कीटों / रोगों से बचाव के लिए संस्तुत रसायनों का प्रयोग करें।
पाला से बचावके लिए खेत के आस पास धुआं करें, जिससे तापमान बढ़ेगा और पाला कम पड़ेगें। पॉलीहाउस, लो-टनल या प्लास्टिक शीट का उपयोग करके पौधों को पाले और ठंड से बचाएं। फलदार छोटे पौधों के ऊपर पालीथीन या घासफूस से छाया कर दें।