“बहु रुपिया”
खुद को रखिये संभाल,
वरना एक दिन आएगा
आप हो जाएंगे बेहाल ।
खुद के भीतर झांके नहीं
औरों को दे उपदेश,
ऐसे उपदेश को सुनो नहीं
ये मचाए सिर्फ क्लेश ।
खुद कभी पुण्य किया नहीं
औरों को पढ़ाए पाठ,
झूठी बातें घूम-घूम करे
समझे इसी में ठाट ।
एक- दूजे को भड़काना
करे ये घटिया काम,
जीवन में ऐसे मानव के
आए ना कभी विश्राम ।
खुद सत्कर्म ना करे कभी
औरों को दे झूठा ज्ञान,
ऐसे कपटी लोगों की बड़ी
मीठी होती जुबान ।
ऐसे बहु रूपियों से दूर रहो
करो ना इनका संग,
वरना फिर पछताओगे
जब खुशियां होगी भंग ।
होती घर में इनकी पूछ नहीं
इसीलिए रखे मन में भटकाव
अच्छे- सच्चे लोगों संग ये
बेवजह करे टकराव ।
भिन्न- भिन्न ये रूप धरे
भिन्न- भिन्न मानव देख,
क्षण भर में ये गढ़ लेते
सुंदर झूठा आलेख ।
ऐसे बहुरुपियों से बचके रहो
रहो ना इनके साथ
वरना एक दिन पछताओगे
जब झुकेगा तेरा माथ ।
डॉ0 संजुला सिंह “संजू”
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