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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 11 May 2021 12:09 PM |   863 views

वाह रे आक्सीजन

 
मोबाइल की घंटी बजी, मैंने कहा ” हलो ” । उधर से एक मेरे मित्र की आवाज आई “मैं बहुत परेशान हूं, मेरी पत्नी को कोरोना हो गया है।”  मैंने कहा “कहां हो मैं अभी आ रहा हूं।” उसने कहा “सरकारी अस्पताल के पीछे वाले गेट पर खड़ा हूं , जल्दी आओ।
 
 मैं भी तुरंत तैयार हो कर मित्र के निर्देशानुसार सरकारी अस्पताल के पीछे वाले गेट पर पहुंच गया।देखा कि मेरा मित्र रो रहा है और मुझे देख कर फफक पड़ा।उसे ढांढस बंधाते हुए पूछा तो उसने सिसकते हुए बताया कि उसकी पत्नी को कल से सांस लेने में दिक्कत हो रही है।खुल कर सांस नहीं ले पा रही है। आज किसी तरह डाक्टर नर्स को हाथ पांव जोड़ते हुए भर्ती कराया गया है लेकिन बेड खाली नहीं मिला तो घर से एक छोटी सी चारपाई लाकर पत्नी को उस पर लिटाया गया है।दवा तो दी गई है लेकिन आक्सीजन के लिए डाक्टर ने बाहर से लेने को कहा है क्योंकि अस्पताल में नहीं है।
 
तब मैंने कहा “यहां क्यों खड़े हो, चलो किसी दवा की दुकान पर बात किया जाए।
मित्र ने कहा “दुकानदार ने दवाएं तो दिया लेकिन आक्सीजन के लिए कहा कि ब्लैक पर लेना पड़ेगा।एक सिलिंडर लगभग पच्चीस हजार रूपए में मिलेगा।
 
 मैंने कहा ” ठीक है ले लो, मैं भी कुछ रुपए लेकर आया हूं चलो।”
मित्र ने कहा “दुकानदार ने कहा है कि अस्पताल के पीछे वाले गेट पर एक घंटे में आओ, मैं वहीं सिलिंडर लेकर आ रहा हूं, उसके बाद मैंने उसे पच्चीस हजार देकर पत्नी के गले से सोने की चेन निकाल लिया और उसे भी बेचकर यहां आकर खड़ा हूं।”
 
मैंने कहा “अरे यार चेन क्यों बेच दिया, मैं तो आ ही रहा था। अच्छा छोड़ो वह कब तक आएगा?” 
 
मित्र ने कहा “पता नहीं कब तक आएगा कहीं पच्चीस हजार लेकर भाग न जाए क्योंकि दो घंटे होने जा रहा है। पता नहीं वो बिचारी किस हाल में होगी।”
 
मैंने कहा “उस दुकानदार को बाद में देखा जाएगा। पहले चलो एक डाक्टर से मेरा परिचय है।उनसे बात किया जाए।”मित्र ने मेरी बात पर तैयार हो गया और मैं उसके साथ उस डाक्टर के बंगले पर पहुंचा तो उसका दरवाजा बंद था,काल बेल का स्विच दबाने पर भी कोई रिस्पांस नहीं मिला।तब मैं अपने मित्र के डाक्टर के बंगले की पीछे वाली खिड़की की तरफ चला सोचा कि शायद इधर से मुलाकात हो जाए। वहां पहुंचते ही देखा कि डाक्टर साहब के साथ एक व्यक्ति आक्सीजन का सिलिंडर लुढ़काते हुए बाहर आ रहा है।इतना देखते ही मेरा मित्र बोल पड़ा “अरे,यह तो वही दवा की दुकान वाला है जो आक्सीजन सिलिंडर के लिए मुझसे पच्चीस हजार रूपए लिया है।
 
मेरे मुंह से भी अचानक निकल गया “वाह रे आक्सीजन।”
(डाॅ0 भोला प्रसाद आग्नेय , बलिया )
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