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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 16 Mar 7:28 PM |   2370 views

आम के फल को झड़ने से कैसे बचाए ?

आम में फल झड़ने की समस्या बहुत ही गंभीर है किसान भाई समय पर ध्यान नहीं देते तो अच्छी बौर आने के बाद भी पेड़ पर बहुत कम या ना के बराबर फल दिखाई देते हैं |
 
आम में फल झड़ने की समस्या के संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र देवरिया के प्रभारी एवं उद्यान वैज्ञानिक रजनीश श्रीवास्तव ने बताया आम में फल गिरने की समस्या कि कई कारण है जैसे नमी की कमी, शुष्क मौसम, उच्च तापमान, परागण की कमी, हार्मोन का असंतुलित होना, पोषण की कमी, गलत समय पर खाद का उपयोग तथा कीट और एवं बीमारियों का आक्रमण प्रमुख है।
 
आम के फूलों एवं फलों को कीट व रोगों से बचाने के उपायों के बारे में जानकारी देते हुए रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि बौर निकलने के साथ ही रस चूसने वाले कीड़ों जैसे भुनगा जिसे हापर भी कहते हैं, गुजिया जिसे मिली बुग कहते हैं और पुष्प गुच्छ मिज का प्रकोप होता है। भुनगा और गुजिया कीट के शिशु एवं प्रौढ़ के कोमल पत्तियों और फूलों तथा अविकसित फलों के रस चूसने से ग्रसित भाग सूख कर गिर जाते हैं। पुष्प गुच्छ मिज़ कीट के प्रकोप से बौर पर काले धब्बे दिखाई देते हैं तथा बौर तेढ़े मेढ़े हो जाते हैं।
 
यह कीट रस चूसने के साथ मीठा द्रव्य उत्सर्जित करते हैं जिससे पत्तियां चिकनी और लस्लसी हो जाती हैं जिस पर काली फफूद आने के कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होती है। इन  कीड़ों की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड या एसिटामाप्रिड कीटनाशक की 3 से 4 मिलीलीटर दवा प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। इस दवा का छिड़काव बौर निकलते समय या फिर सरसों के बराबर दाने बन जाने पर करना चाहिए। ध्यान रहे फूल आने की दशा में किसी कीटनाशक या रसायन का छिड़काव नहीं करना चाहिए। इसके बाद जब आम मटर के दाने के बराबर हो जाए तो क्विनाल्फास या ट्राइजोफास  या प्रोफेनोफास नामक दवा की 1 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
 
आम के बौर पर खर्रा या दहिया, एंथराकनोज एवं काली फफूंदी रोग लगने से फल – फूल गिरते हैं। खर्रा रोग लगने से पुष्पवृंत, पुष्प, अविकसित फल एवं कोमल पत्तियों पर सफेद चूर्ण दिखाई पड़ते हैं। इसी प्रकार एंथ्रेक्नोज एवं काली फफूंदी रोग से प्रभावित होने पर ग्रसित भाग सूख कर गिर जाते हैं इन लोगों से बचाने के लिए घुलनशील सल्फर कि 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए आवश्यकता पड़ने पर दूसरा छिड़काव कार्बेन्डाजिम तथा मैकोजेब कि एक एक ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। बौर पर लगने वाले कीड़ों एवं रोगों से बचाने के लिए बताए गए छिड़काव में कीटनाशी एवम  फफूद नाशी रसायनों की संस्तुति मात्रा मिलाकर एक साथ करने से धन की बचत की जा सकती है। छिड़काव के लिए घोल बनाते समय कोई चिपकने वाला पदार्थ जरूर मिलाना चाहिए। फलों को गिरने से बचाने के लिए मटर के दाने के आकार के फल हो जाने पर नेप्थलीन एसिटिक एसिड कि 20 पीपीएम या प्लेनोफिक्स की 1 मिलीलीटर मात्रा  4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से फल झड़ने में कमी आ जाती है फल वृद्धि की अवस्था में पोटेशियम नाइट्रेट (एनपीके 13 :0:45) की 10 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी तथा सूक्ष्म तत्वों का मिश्रण जिसमें बोरान तांबा जिंक और आयरन हो की 5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़कने से फलों में अच्छी वृद्धि पाई जाती है। फल बनने से परिपक्वता आने तक की स्थिति में बाग में नमी बनाए रखना चाहिए।
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