Monday 5th of October 2026 06:45:39 AM

Breaking News
  • भारत की वित्तीय स्थिति मजबूत- RBI गवर्नर|
  • अल्मोड़ा में महिलाओं ने शुरू की लिलियम की खेती |
  • तिरुपति में बायलर हादसा ,5 कर्मचारियों की मौत|
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 15 Oct 4:43 PM |   669 views

खेतीहर महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए मनाया गया राष्ट्रीय किसान महिला दिवसः प्रो रवि प्रकाश

 
बलिया – आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौधोगिक विश्वविद्यालय  कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि  विज्ञान केन्द्र सोहाँव बलिया  द्वारा खेतीहर महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए  राष्ट्रीय किसान महिला  दिवस के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
 
गोष्ठी की मुख्य अतिथि जनपद बलिया की कृषि  रक्षा अधिकारी श्रीमती प्रिया नन्दा रही। श्रीमती नन्दा  ने अपने सम्बोधन में कहा कि  कृषि के क्षेत्र में  सभी जगह महिलाओं की भागीदारी है । 
 
कृषि मे महिलायें बुआई से लेकर फसल की कटाई ,मड़ाई ,अन्न भण्डारण तक का कार्य करती है । उन्होने बताया कि चूहों से  पीलिया,  मच्छरों से ढेगू, मलेरिया, तथा  मक्खियों  से  डायरिया आदि रोग फैलते है। इस लिये घर बाहर सभी जगह सफाई रखना आवश्यक है। तथा समय से इनका प्रबधन करें ।
 
केन्द्र के अध्यक्ष प्रोफेसर रवि प्रकाश मौर्य ने  बताया कि केन्द्रीय कृषि औऱ किसान कल्य़ाण मंत्रालय ने 15 अक्टूबर  2015 से  राष्ट्रीय किसान महिला  दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की है । कृषि विकास के जरिए देश के किसानों को सशक्त औऱ मजबूत बनाने  पर ध्यान दे रही है। कृषि में महिलाओं की भागीदारी बढे़ और उनमें आत्म स्वाभिमान का भाव जगे इसके लिए  राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाने की शुरुआत की गयी है।  यह दिवस  खेतीहर महिलाओं के विकास और सम्मान का प्रतीक हैा 
 
सह प्राध्यापक (गृह विज्ञान  ) महिला वैज्ञानिक ,डा .प्रेमलता श्रीवास्तव ने  कृषि में   अवशेष प्रबंन्धन और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर जोर दिया। ई. एम.पी. स़िह सह प्राध्यापक (कृषि अभियंत्रण )   ने महिलाओं द्वारा खेती मे प्रयोग किये जाने वाले यंत्रों पर जानकारी दी । राजीव कुमार सिंह ने  नर्सरी प्रबंन्धन पर प्रकाश डाला।
 
बेद प्रकाश सिंह प्रक्षेत्र प्रबंधक ने  धन्यवाद दिया । कार्यक्रम मे  सोहाँव ब्लाक के सहायक विकास अधिकारी (कृषि) सहित 55 से अधिक कृषक महिलाओं,नवयुवतियों  व नवयुवकों ने भाग लिया।
Facebook Comments