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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 15 Aug 8:33 AM |   1983 views

किसी फसल में दाने/फल क्यों झड़ते हैं?

पौधों में कीट के कुतरने का अलावा भी अन्य कारण है जिस तरफ किसानों का ध्यान नही जाता। अक्सर ये देखा जाता है कि किसान कीट-बीमारियों के लिये अंधाधुंध कीटनाशियों और अन्य सम्बन्धित केमिकल्स का प्रयोग तो कर देते हैं लेकिन वास्तविक समस्याओं के समाधान से अछूते रह जाते हैं।
 
कुछ विशेष कारण जो ज्यादातर फसलों विशेषतया खरीफ सीजन की फसलों में दाने झड़ने की वजह हैं, इस प्रकार है- 
 
1.- जानकारी के अभाव के कारण, जैसे अपने खाने में नमक की तरह पौधों को भी सूक्ष्म तत्व जरूरी है। जिसे बेहद ही कम % संख्या में किसान सूक्ष्म तत्वों का पोषण देते हैं।
 
2- गोबर, वर्मीकम्पोस्ट जैसे खाद न देने से, न ही हरी खाद और अन्य खली वगैरह कभी भी देने से  जमीन में इन तत्वों की उपलब्धता होती है, पूर्व की फसलों द्वारा भी मिट्टी से इन तत्वों का अवशोषण हो चुका है जिनकी पूर्ति भी नही करी गयी होती है।
 
3- अवैज्ञानिक रूप से खेती करना, ज्यादा हरे दिखने की कोशिश में यूरिया की मात्रा बढ़ाना।
4- मौसम की अनिश्चितता के कारण कभी अत्यधिक सूखे और फिर अत्यधिक बरसात की स्थिति का सामना।
 
इनके अलावा जो अन्य कारण भी हैं, वो हैं-
 
1- दाने भरते समय पोटाश की अनुपलब्धता या एक्स्ट्रा पूर्ति न होना।
 
2 – नमी के कारण पौधे का व्यवहारिक रूप में फूल, फल झाड़ना।
 
3- ज्यादा जलभराव के कारण सड़न होना।
 
4- जड़ क्षेत्रो से पोषक का दूर जाना और पौधे का वानस्पतिक वृद्धि( ज्यादा यूरिया देने के कारण) फलों का झड़ना, कीड़ो-बीमारियों का बढ़ना।
 
5- पुष्पन और फल बनते समय सूक्ष्मतत्वो विशेषतया कैल्शियम और बोरोन की कमी से कोशिका विभाजन और कोशिकाओं का बढ़ना प्रभावित हुआ जिस वजह से फूल, फल झड़ना बढ़ जाना।
 
6- फल बनते समय बहुत तीव्र रसायनों का और ज्यादा मात्रा में प्रयोग करना।
 
उपाय-
1- मिट्टी में हर सीजन बुवाई वक्त जितना सम्भव हो सके अनुशंसित अनुपात के अंदर गोबर की बढ़िया पकी खाद, वर्मी कम्पोस्ट, सरसो-नीम खली जैसे तत्व मिलाना।
 
2- फसल बोने की 35 दिन की/ कल्ले फूटने/ प्रारम्भिक वानस्पतिक वृद्धि अवस्था पर कैल्शियम नाइट्रेट जिसमे बोरोन भी मिली हो, को देना सुनिश्चित करना।
 
3- फूल बनने की पूर्व और बनते वक्त की अवस्था मे अच्छे जैव आधारित तत्व जैसे इफको सागरिका/ हुमेत्सु या अन्य किसी प्राइवेट कम्पनी की समुद्री घास अर्क वाले प्रोडक्ट अथवा हमेशा ही जीवामृत, वर्मीवाश जैसे तत्व प्रयोग करना।
 
4- फसल में दाने बनते वक्त 0:52:34 जैसे फास्फोरस और पोटाश युक्त तत्व का छिड़काव, जिनमे नाइट्रोजन न या फिर कम हो को प्रयोग करना।
 
5- दाने भरते, फल बढ़ते समय 0:0:50 जलीय उर्वरक का छिड़काव।
 
6- पानी निकलने की जलनिकास नाली/ ड्रेनेज चैनल बनाये रखना या उठे- बेड सिस्टम से बुवाई करना।
 
7- बचाव ही उपचार है कि तर्ज पर और कम घातक कीटनाशियों विशेषतया जैविक कीटनाशकों, फफूंद नाशको और जीवनुनाशको जैसे- बिवेरिया बैसियाना, ट्राइकोडर्मा हरजियेनम और स्यूडोमोनास फ्लूरोसेन्स जैसे अन्य अवयव प्रयोग में लेना।
 
विशेष:– किसान भाइयों और बहनो से अनुरोध है कि समस्त सुझाये प्रयासों में से अपने स्थान पर उपलब्ध परिस्थितियों अनुसार इन विधियों को अपनाये और इस प्रकार सिर्फ दुकानदारों के प्रोडक्ट बेचने वाले प्रयासों में ही फँसकर खेती की लागत न बढायें।
 
( डॉ शुभम कुलश्रेष्ठ , असिस्टेंट  प्रो . रवीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी ,रायसेन )
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