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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 26 Mar 2020 6:10 PM |   829 views

पापा घर में ही रहना

कब से बच्चे तरस रहे थे 

सपने उनके बिखर रहे थे 

पापा के संग कब खेलेंगे 

पापा से कब गप्पे मारेंगे 

पापा मम्मी को संग लेकर 

पार्क में झूला झूलेंगे 

सपना देख बड़े हो गये 

पापा को कब वक़्त मिला था 

बिन पापा के बच्चों का 

कब हसीं का फूल खिला था 

अब कोरोना का डर आया 

21 दिन घर में बिठलाया 

सारे मिलकर खेल रहे हैं 

इस आफत को झेल रहे हैं 

माना अब चिज्जी नही आती 

पापा जी की गोद रिझाती 

पापा मत बाहर जाना तुम 

जी लेंगे रुखा -सुखा खाकर 

बहुत खुश है हम तुमको पाकर 

21 दिन बस तुम घर में रह लो 

जो कहना है सारा कह लो 

फिर खुशियों के दिन लौटेंगे 

हम मस्ती अपनी घोटेंगे 

आप काम पर रोज फिर जाना 

चिज्जी खूब खिलौने लाना 

बस अब कुछ न जिद करना 

21 दिन घर पर  ही रहना  

बच्चों वाली बात न समझो 

कोरोना को आम न समझो 

बहुत ही घातक  दुश्मन आया

जिसने सबको  घर बिठलाया 

हम भूखे -प्यासे रह लेंगे 

कुछ दिन यूँ ही कट जाएँ 

दादी वाली बात सुना दो 

थोडा सा मन को बहला दो

नही उदासी लगती अच्छी 

बिन पानी कब जिन्दा मच्छी 

21 दिन संग -संग बीतेंगे 

फिर पापा हम ही जीतेंगे 

( डॉ नरेश सागर , हापुड़ )

 

 

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