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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 26 Feb 2022 6:28 PM |   1292 views

मूक बधिर बच्चों के बीच ‘चित्रकला प्रतियोगिता‘ का आयोजन किया गया

गोरखपुर -आजादी का अमृत महोत्सव के अन्तर्गत चन्द्रशेखर आजाद के शहीद दिवस की पूर्व संध्या पर आज राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर (संस्कृति विभाग, उ0प्र0) द्वारा ‘संकेत‘ (मूक बधिर बालकों का राजकीय विद्यालय) हुमायूॅपुर (उ0), गोरखपुर में जूनियर वर्ग (कक्षा-1 से 5 तक) तथा सीनियर वर्ग (कक्षा 6 से 10) के बच्चों के मध्य ‘चित्रकला प्रतियोगिता‘ का आयोजन किया गया।

उक्त प्रतियोगिता में कुल 58 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ0 भारत भूषण, पूर्व विभागाध्यक्ष, ललित कला एवं संगीत विभाग, दी0द0उ0गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर ने माॅं सरस्वती के मूर्ति पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। उक्त अवसर पर भोजपुरी लोकगायक राकेश श्रीवास्तव एवं शिवेन्द्र पाण्डेय भी उपस्थित रहे।

चित्रकला प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपने कला कौशल का परिचय देते हुए हुनरमन्द हाथों से बेटी ‘भगवान बुद्ध पर आधारित चित्रकला‘ अथवा ‘हमारा पर्यावरण‘ अथवा ‘प्राकृतिक दृश्य का अद्भूत नमूना पेश किया। रेखांकन, रंग संयोजन एवं विषयवस्तु को दृष्टिगत रखते हुए स्तरीय चित्रों का चयन किया गया।

उक्त प्रतियोगिता में ‘संकेत‘ (मूक बधिर बालकों का राजकीय विद्यालय) हुमायूॅपुर (उ0), गोरखपुर के जूनियर वर्ग की मुस्कान गुप्ता ने प्रथम, साधना सिंह ने द्वितीय, गोल्डी वर्मा ने तृतीय पुरस्कार तथा परी गुप्ता ने सान्त्वना पुरस्कार प्राप्त किया।

सीनियर वर्ग में अंजली सिंह ने प्रथम, दीप्ति रावत ने द्वितीय, सोनम श्रीवास्तव ने तृतीय पुरस्कार तथा मानसी गुप्ता ने सान्त्वना पुरस्कार प्राप्त किया। विजेता प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि डाॅ0 भारत भूषण द्वारा पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। उत्साह वर्धन स्वरूप समस्त प्रतिभागियों को कलर स्केच पेन का सेट प्रदान किया गया।

उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डाॅ0 भारत भूषण ने अपने सम्बोधन में कहा कि दिव्यांग बच्चों में प्रकृति ने अतिरिक्त योग्यता दे रखी है। बच्चों का उत्साह निश्चय ही बहुत अद्भुत है। बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि सभी बच्चों प्रतिभा सम्पन्न हैं। ये बच्चे दिव्यांग जरूर है, किन्तु कला में रूचि का जज्बा देखकर हम उनके हौसले का सलाम करते हैं। ये बच्चें कुछ भी कर गुजरने में सक्षम हैं। इन्हें किसी भी दशा में कम नहीं आका जा सकता है। छात्र-छात्राओं में कलात्मक प्रतिभा कूट-कूट कर भरी हुई है और सभी बच्चों ने बहुत ही अच्छे चित्र बनाये। चित्रों के माध्यम से उन्होंने विभिन्न विषयों पर सन्देश बड़े ही प्रेरक सन्देश प्रस्तुत किये। उनकी कला को निखारने के लिए राजकीय बौद्ध संग्रहालय (संस्कृति विभाग, उ0प्र0) की तरफ से दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु की गयी पहल निश्चय ही सराहनीय है। यही बच्चे देश के भविष्य हैं। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों एवं आयोजकों के प्रति शुभकामना व्यक्त किया।

संग्रहालय के उप निदेशक डाॅ0 मनोज कुमार गौतम ने कहा कि कला के क्षेत्र में दिव्यांग बच्चों की अभिरूचि बढ़ाने तथा उनके प्रतिभा को एक नया आयाम देने के लिए संग्रहालय द्वारा इस तरह के आयोजन किये जाते हैं। संग्रहालय द्वारा प्रति वर्ष इन बच्चों के बीच चित्रकला प्रतियोगिता कराकर उनकी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्रदान किया जाता है। डाॅ0 गौतम ने कहा कि इन बच्चों में अद्भूत रचनात्मकता है। जरूरत है इनको अवसर प्रदान करने की। यही बच्चे आने वाले कल के लिए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवायेंगे।

मुख्य अतिथि एवं संग्रहालय के उप निदेशक द्वारा सम्बोधन में कही गई बातों को ‘संकेत‘ विद्यालय के सहायक अध्यापक विनय कुमार ने समस्त प्रतिभागियों को संकेत के माध्यम से समझाया।

कार्यक्रम के अन्त में संग्रहालय के उप निदेशक ने अतिथियों, ‘संकेत‘ विद्यालय की प्रधानाचार्या  नीलम कुरील सहित विद्यालय के शिक्षकगण, विद्यालय तथा अभिभावकगण, समस्त प्रतिभागियों एवं पत्रकार बन्धुओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

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