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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 20 Jan 2026 7:59 PM |   560 views

नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह को ‘बौद्ध संस्कृति संवर्धन पुरस्कार’

नव नालंदा महाविहार ,नालंदा ( संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ) के कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित ‘बौद्ध संस्कृति संवर्धन पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। यह पुरस्कार उन्हें गणतंत्र दिवस, 2026 के अवसर पर राजभवन, लखनऊ में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा प्रदान किया जाएगा।
 
यह सम्मान बौद्ध संस्कृति और बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में दीर्घकालिक एवं महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए दिया जाता है। पुरस्कार के अंतर्गत रु 51,000 की नकद राशि भी प्रदान की जाएगी।
 
प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग में वरिष्ठ प्राध्यापक रहे हैं। वे वर्ष 2018 से 2022 तक जापान स्थित भारतीय दूतावास, टोक्यो में डायरेक्टर, इंडियन कल्चरल सेंटर के रूप में कार्यरत रहे, जहाँ उन्होंने भारत-जापान के सांस्कृतिक और सॉफ्ट-डिप्लोमेसी संबंधों को सशक्त करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
 
उन्हें इससे पूर्व भी अनेक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें जापान फाउंडेशन फेलोशिप (2003-04), फुलब्राइट सीनियर रिसर्च फेलोशिप, अमेरिका (2011-12) तथा वादरायण व्यास राष्ट्रपति पुरस्कार (2005) प्रमुख हैं।
 
प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह स्वीडन की उप्साला यूनिवर्सिटी (ICCR चेयर, 2014-15), कार्लस्टैड यूनिवर्सिटी तथा हैदराबाद विश्वविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं। उन्होंने अब तक चार महत्त्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं और हिंदी, अंग्रेज़ी तथा जापानी भाषाओं में 80 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। उन्होंने भारत सहित अमेरिका, जापान, चीन, स्वीडन, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार, वियतनाम और नेपाल जैसे अनेक देशों में व्याख्यान दिए हैं।
 
उनके प्रमुख शोध-क्षेत्रों में बौद्ध धर्म के अनुप्रयुक्त पक्ष, पालि-संस्कृत साहित्य, भारतीय संस्कृति, विश्व धर्म और दर्शन तथा जापानी बौद्ध परंपरा शामिल हैं।
 
इस सम्मान की घोषणा से नव नालंदा महाविहार तथा बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में हर्ष और गौरव का वातावरण है। यह उपलब्धि नालंदा की बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा प्रदान करती है।
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