कोहबर कला हमारी लोक संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर- मंगलेश
गोरखपुरः-राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय ’’लोक में कोहबर कला” कार्यशाला का समापन समारोह रविवार को प्रमाण-पत्र वितरण एवं प्रदर्शनी आयोजन के साथ सम्पन्न हुआ।
प्रदर्शनी का शुभारम्भ मुख्य अतिथि गोरखपुर के महापौर डॉ0 मंगलेश श्रीवास्तव ने दीप प्रज्जवलित कर किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।मुख्य अतिथि को राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उप निदेशक डॉ0 यशवन्त सिंह राठौर ने अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। डॉ0 राठौर ने कार्यशाला की विस्तृत जानकारी के साथ अतिथि का स्वागत किया।
अपने उद्धबोधन में महापौर ने कहा की कोहबर कला हमारी लोक संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है। इस कला के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक सम्पदा की जड़ों से जुड़ते हैं। कार्यशाला के दौरान युवा कलाकारों द्वारा कोहबर कला के विविध रूपों को कैनवास पर उकेरना एवं चित्रित करना अद्भुत है। इन युवआंे के माध्यम से हम अपनी प्राचीन भित्ति कला को अगली पीढ़ी हेतु गतिशील एवं संरक्षित कर सकते हैं। उन्होंने बौद्ध संग्रहालय के इस प्रयास को उत्कृष्ठ एवं सराहनीय कहा।
मुख्य प्रशिक्षक उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान, लखनऊ की सदस्य डॉ. कुमुद सिंह ने कहा की सभी कलाकारों में अद्भुत हुनर है। आवश्यकता है इन्हें समय-समय पर तरासने की, जो कि राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा निरन्तर किया जा रहा है। उन्हें अपनी प्राचीन कलाओं से जोड़ने का जो अभियान संग्रहालय ने चलाया है वह प्रशंसनीय है। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में भी युवाओं के लिए ऐसे आयोजन होते रहेंगे।
इस मौके पर चयनित 05 प्रतिभागियों को कोहबर कला की उत्कृष्ट कलाकृतियॉं सृजित करने हेतु विशिष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।साथ ही कार्यशाला में शमिल गोरखपुर व बस्ती मण्डल के सभी 30 कलाकारों को प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम के संयोजक एवं संचालक प्रेमनाथ ने सभी कलाकारों तथा गणमान्य अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर डॉ0 विनीता गुप्ता, रेनू लता पाठक, कुलवन्त सिंह, आस्था यादव, डॉ0 रोली तिवारी, मोहन कुमार यादव, मलय मिश्र, मनीष तिवारी, वन्दना दास, आदित्य कुमार वर्मा, निवेदिता यादव, आदि मौजूद रहे।
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