Thursday 22nd of October 2026 07:14:48 PM

Breaking News
  •  दुनिया के सबसे भीषण खसरे के प्रकोप का सामना कर रहा बांग्लादेश-WHO|
  • जमुई में मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा ,हथियार बनाने के उपकरण बरामद |
  • लखनऊ में पुलिकर्मियों को योगी सरकार की सौगात , भत्तों में बढ़ोत्तरी का ऐलान|
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 14 Nov 2019 2:56 PM |   1544 views

सबरीमला मामला- न्यायालय ने पुनर्विचार के लिए समीक्षा याचिकाएं सात न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजी

नईदिल्ली-  उच्चतम न्यायालय ने सबरीमला मामले में दिए गए उसके फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली याचिकाएं सात न्यायाधीशों की वृहद पीठ के पास भेजते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध केवल सबरीमला तक ही सीमित नहीं है बल्कि अन्य धर्मों में भी ऐसा है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपनी ओर से तथा न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की ओर से फैसला पढ़ा। इसमें उन्होंने कहा कि सबरीमला, मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश और दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं में खतना जैसे धार्मिक मुद्दों पर फैसला वृहद पीठ लेगी।  सबरीमला मामले पर फैसले में न्यायमूर्ति आरएफ नरिमन और डीवाई चंद्रचूड़ की राय अलग थी।

मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक का हवाला देते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को सबरीमला जैसे धार्मिक स्थलों के लिए एक समान नीति बनाना चाहिए ।प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे धार्मिक मुद्दों पर सात न्यायाधीशों की पीठ को विचार करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सबरीमला मामले में पुनर्विचार समेत सभी अन्य याचिकाएं उच्चतम न्यायालय के सात न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजीं । शीर्ष अदालत ने 28 सितंबर 2018 को 4 के मुकाबले एक के बहुमत से फैसला दिया था जिसमें केरल के सुप्रसिद्ध अयप्पा मंदिर में 10 वर्ष से 50 की आयुवर्ग की लड़कियों एवं महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को हटा दिया गया था। फैसले में शीर्ष अदालत ने सदियों से चली आ रही इस धार्मिक प्रथा को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया था।

Facebook Comments