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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 29 Sep 2019 4:20 PM |   1594 views

गांधी के विचारों को व्यवहार में उतार रहे हैं विदेशी छात्र

अहमदाबाद-  राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए युवाओं को तैयार करने के लक्ष्य से महात्मा गांधी द्वारा 1920 में स्थापित गुजरात विद्यापीठ ना सिर्फ विभिन्न क्षेत्रों में उच्च शिक्षा दे रहा है बल्कि विभिन्न देशों से आने वाले छात्रों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों की सीख भी दे रहा है।1963 से ही डीम्ड विश्वविद्यालय गुजरात विद्यापीठ स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की शिक्षा देने के अलावा विशेष रूप से विदेशों से आने वाले छात्रों के लिए ‘गांधी की अहिंसा पर अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम’ नाम से चार महीने का डिप्लोमा भी देता है। इसका लक्ष्य है कि विभिन्न देशों से आने वाले छात्र उनके विचारों और सिद्धांतों को सीखें और अपने देश लौटकर उनका जीवन में अनुकरण करें।गांधी अध्ययन संकाय के प्रेम आनंद मिश्र का कहना है कि इस पाठ्यक्रम ने अमेरिका, मेक्सिको, फ्रांस, अर्जेंटिना, ब्राजील, घाना, दक्षिण सूडान और इंडोनेशिया से आने वाले कई छात्रों का दृष्टिकोण बदला है। विद्यापीठ ने 2011 में यह डिप्लोमा शुरु किया था।

पाठ्यक्रम के समन्वयक मिश्रा का कहना है, ‘‘चार महीने के इस पाठ्यक्रम का लक्ष्य छात्रों को अहिंसा के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं का पाठ पढ़ाना है जिन्हें गांधी ने अपने निजी और सार्वजनिक जीवन में लागू किया। अभी तक 15-16 देशों के करीब 70 छात्र इस पाठ्यक्रम को पूरा कर चुके हैं।इसमें ज्यादा ध्यान व्यवहारिकता पर दिया जाता है। छात्रों को गांधी के विचारों से जुड़ी अन्य संस्थाओं और आश्रमों, जैसे जलगांव स्थित गांधी अनुसंधान फाउंडेशन और भावनगर स्थित सम्पूर्ण क्रांति विद्यालय, लोक भारती ले जाया जाता है। उन्हें प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्रों और जैविक कृषि केन्द्रों का भी भ्रमण कराया जाता है। मिश्रा ने कहा, ‘‘छात्र इन जगहों पर पांच से दस दिन के लिए रुकते हैं, चीजों को समझते हैं, उनका अध्ययन करते हैं और विभिन्न गांधीवादी सिद्धांतों को व्यवहार में लागू करते हैं। पाठ्यक्रम पूरा कर स्वदेश लौट चुके कई छात्र हमें सूचित करते हैं कि कैसे उन्होंने अपेन देश में गांधीवादी सिद्धांतों को लागू किया है।वह बताते हैं कि ब्राजील से आया एक छात्र ‘नयी तालिम’ के गांधीवादी सिद्धांत से इतना प्रेरित हुआ कि उसने अपने देश में बच्चों को ऐसी मौलिक शिक्षा देने के लिए स्कूल शुरु किया है। गांधीवादी सिद्धांत कहता है कि ज्ञान और कार्य कभी अलग-अलग नहीं हो सकते हैं।

मिश्रा ने बताया, ‘‘ब्राजील के इस छात्र ने उनसे कुछ चरखे भेजने का अनुरोध किया है ताकि अपने देश में वह छात्रों को खादी बनाना सिखा सके। घाना की एक छात्रा अब अपने देश में कार्यशालाओं का आयोजन कर सभी को बता रही है कि कैसे गांधी के अहिंसा का उपयोग कर घरेलू मुद्दों को सुलझाया जा सकता है।उन्होंने कहा, ‘‘यहां वह सीखते हैं कि कैसे छोटी-छोटी शुरुआत की जा सकती है। पाठ्यक्रम के दौरान जैविक कृषि की शिक्षा लेने वाले अर्जेंटिना के एक छात्र ने अपने देश में रसोई घर से निकलने वाले कचरे को खाद में बदलने का छोटा प्लांट शुरु किया है। वह लोगों को सिखा रहा है कि कैसे छोटे-छोटे कदम समाज को बदल सकते हैं।गुजरात विद्यापीठ की स्थापना के अगले साल 100 वर्ष पूरे हो जाएंगे।

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