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By : shweta mehrotra | Published Date : 17 Dec 2022 7:45 PM |   832 views

“भारतीय मुद्रा कला मध्यकालीन सिक्कों के विशेष सन्दर्भ में कार्यक्रम आयोजित

लखनऊ: राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा आयोजित “कला अभिरुचि पाठ्यक्रम” की श्रृंखला के अन्तर्गत आज “भारतीय मुद्रा कला मध्यकालीन सिक्कों के विशेष सन्दर्भ में” सर्वेक्षण, केन्द्रीय पुरानिधि सवेक्षण अनुभाग, विषय पर मुख्य वक्ता डॉ० शमऊन अहमद, भारतीय पुरातत्व पुराना किला, नई दिल्ली” द्वारा पावर प्वाइन्ट के माध्यम से रूचिकर व्याख्यान दिया गया।

इस अवसर पर डॉ० मीनाक्षी खेमका द्वारा पुष्प गुच्छ भेंट कर वक्ता का स्वागत किया तथा मुख्य वक्ता के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला।

इस श्रृंखला में प्रथमतः वक्ता द्वारा सिक्को की परिभाषा को बताया गया, जो विनिमय का एक साधन है। भारतीय मुद्रा का इतिहास बहुत पुराना है। जिसका निश्चित तौल होता है तथा सरकार या शासन द्वारा मान्यता प्राप्त होती है। सिक्कों के अध्ययन को न्यूमेसमेटिक कहा जाता है इसी क्रम में वक्ता ने प्राचीन विनिमय प्रणाली यथा -फूटी कौड़ी, कौड़ी से कौड़ी, कौड़ी से दमड़ी, दमड़ी से धेला, धेला से पाई पाई से पैसा, पैसा से आना, आना से रूपया के विषय में व्याख्या की। छटी शताब्दी ईसा पूर्व से मुद्रा का इतिहास प्रारम्भ होता था ।

प्रारम्भिक सिक्के ढाल कर बनाये जाते थे इनमें एक ही ओर एक से पाँच चिन्ह या प्रतीक अंकित होते थे । पाणिनी की अष्टाध्यायी में “आहत’ शब्द का प्रयोग मिलता है जिसमें कर्षापण और शतनाम की चर्चा की गई है । इसके साथ ही विद्वान वक्ता ने मध्यकालीन सिक्को, प्राचीन एवं मध्यकालीन सिक्कों में अन्तर को भी बताया। अल्वरूनी के विषय में बताते हुए कहा कि उन्होने भारतीय विज्ञान के विषय में चर्चा की। ज्यामितीय, कैलीग्राफी, भारतीय सल्तनत, मुगल एवं अवध के नवाबों के द्वारा चलाये गये सिक्कों को स्लाइड के माध्यम से भी दिखाया गया है, तथा उनके बारे में विस्तार से चर्चा की गई ।

उत्तर भारत और दक्षिण भारत के सिक्कों के विषय में की चर्चा की। अलग-अलग शासकों द्वारा जारी सिक्कों के काल-स्टैण्डर्ड के विषय में बताते हुए चर्चा की। शाहजंहा द्वारा जारी स्वर्ण सिक्के के बारे में विस्तार से चर्चा की । अवध के सिक्के मुगल शैली में जारी होते थे जिनमें मछली का अंकन मिलता है।

कार्यक्रम के अन्त में संग्रहालय की सहायक निदेशक डॉ० मीनाक्षी खेमका ने वक्ता को धन्यवाद ज्ञापित करते हुये प्रश्नगत विषय के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सिक्के किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को दर्शाते है।

उक्त अवसर पर तृप्ति राय, शारदा प्रसाद त्रिपाठी, डॉ० अनिता चौरसिया, धनन्जय कुमार राय, प्रमोद कुमार सिंह, अनुपमा सिंह, शालिनी श्रीवास्तव, गायत्री गुप्ता, नीना मिश्रा, बृजेश यादव, सुरेश कुमार, सत्यपाल एवं परवेज़ आदि उपस्थित रहे ।

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