Wednesday 23rd of September 2026 08:42:44 PM

Breaking News
  • मुख्यमंत्री योगी का ऐलान-एक लाख सरकारी नौकरी का प्लान |
  • लखनऊ में 11 एमएलसी सीटों पर चुनाव की अधिसूचना जारी|
  • अप्रैल -मई तक भारत की बुलेट ट्रेन पटरियों पर उतारने का लक्ष्य -रेल मंत्री
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 15 Nov 2022 4:51 PM |   897 views

पूर्वांच्चल मे मशरूम उत्पादन की अपार सम्भावनाएंः प्रो.रवि प्रकाश

मशरूम  जिसे क्षेत्रीय भाषाओं में कुकुरमुत्ता, भूमिकवक, खुम्भ, खुम्भी,गर्जना एवं धरती के फूल  आदि कई नामों से जाना जाता है।, प्रायः  बरसात के दिनों में छतरीनुमा संरचनायें  सडे़ -गले कूडे़ के ढेरों पर या गोबर की खाद या लकडी़ पर देखने को मिलता है, जो एक तरह का वह भी मशरूम ही है।

इसे आसानी से घर मे भी उगाया जा सकता है।मशरूम का प्रयोग सब्‍जी , पकौडा़ सुप ,मुरब्बा, आचार  आदि के रूप  में किया जाता है।  मशरूम खाने में स्‍वादिष्‍ट, सुगन्धि्त , मुलायम तथा पोषक तत्‍वों से भरपूर होती है। इसमें  वसा तथा शर्करा कम होने के कारण यह मोटापे, मधुमेह तथा रक्‍तचाप से पीड़ित व्‍यक्तियों के लिए आदर्श  शाकाहारी आहार है ।व्‍यावसायिक रूप से तीन प्रकार की मशरूम उगाई जाती है। बटन मशरूम, ढींगरी  मशरूम तथा धान पुआल मशरूम। तीनों  प्रकार की मशरूम को किसी भी हवादार कमरे या सेड में आसानी से उगाया जा सकता है।

प्रसार्ड ट्रस्ट मल्हनी भाटपार रानी  देवरिया के निदेशक प्रो.रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि ढींगरी मशरूम उगाने का सही  समय अक्‍टूुबर से मध्‍य अप्रैल के महीने हैं।

सामान्‍यत: 1.5 किलोग्राम सूखे पुआल/भूसे  या 6 किलोग्राम गीले पुवाल/ भूसे से लगभग एक किलोग्राम ताजी मशरूम  आसानी से प्राप्‍त होती है। जिसकी कीमत रू 60-80 प्रति किग्रा. है।

बटन मशरूम हेतु तैयारी  मध्य अगस्त माह से प्रारम्भ करते है।  एक  कुन्टल तैयार किये  गये कम्पोस्ट से 15-20 किग्रा. बटन मशरुम की उपज होती है ।उत्पादन खर्च प्रति किग्रा. रू 35-40/ ,  बिक्री दर रू100-150/,  शुध्द लाभ  रू65-100/ प्रति किग्रा. होता है।

प्रो.मौर्य ने बताया कि पूर्वांच्चल  में मशरूम उत्पादन करने की अपार सम्भावनाएँ है , लगभग सभी  जनपदों मे छिटपुट  ढिगरी एवं बटन मशरूम की खेती हो रही है। जिसमे बाराबंकी, बस्ती ,देवरिया एवं गोरखपुर जनपद अग्रणी है। किसानों के पास मशरूम  उत्पादन मे उपयोग होने  वाले अधिकतर संसाधन जैसे-भूसा,पुवाँल ,कम्पोस्ट ,बेसन, बास,रस्सी आदि  उपलब्ध है।

केवल  मशरूम का स्पान (बीज )  ही बाहर   (देवरिया, बस्ती , लखनऊ या वाराणसी) से मंगाना पड़ेगा। उसमें प्रयोग होने वाले  उर्वरक, फफुँदीनाशक,  स्थानीय बाजार में उपलब्ध है।

मशरूम की खेती करने का तरीका खाद्यान्न एवं बागवानी फसलों से बिल्कुल अलग है, अत़ः इसकी खेती की शुरूआत करने से पहले तकनीकी एवं व्याहारिक ज्ञान  हेतु प्रशिक्षण लेना लाभकारी होगा।

जिसके लिए युवक,युवतियां, किसान मशरूम से सम्बंधित जानकारी के लिये अपने जनपद के कृषि विज्ञान केन्द्र ,उद्यान विभाग , या मशरुम  उत्पादकों से सम्पर्क कर सकते है।

Facebook Comments