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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 20 Mar 2026 7:27 PM |   64 views

’’हमारे संग्रहालय संस्कृति के संरक्षक, संवाहक एवं ज्ञान का केन्द्र हैं’

गोरखपुरः-राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा आयोजित ’’हमारे संग्रहालयः भारतीय ज्ञान का वातायन’’ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह कार्यशाला का सम्पूर्ति सत्र आज अपरान्ह् 02ः30 बजे यशोधरा सभागार में सम्पन्न हुआ। सम्पूर्ति सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में डा0 मंगलेश कुमार श्रीवास्तव, महापौर नगर निगम, गोरखपुर द्वारा सभी प्रतिभागियों को सम्बोधित किया गया।
 
महापौर ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि बौद्ध संग्रहालय के आयोजन हमारी संस्कृति के ज्ञान के वातायन के दृष्टिकोण को चरितार्थ कर रहे हैं। संग्रहालय शिक्षा का केन्द्र होते हैं जो कि अतीत के संरक्षक एवं भविष्य के लिए संस्कृति के संवाहक की भूमिका निभाते हैं। गोरखपुर नगर निगम में भी नगर निगम के इतिहास को संरक्षित व अभिव्यक्त करने के दृष्टिकोण से एक संग्रहालय विकसित किया जा रहा है। राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर द्वारा आयोजित कार्यशालाएं, संगोष्ठियाॅं, प्रदर्शनियाॅं, प्रतियोगिताएं एवं विभिन्न प्रकार के शैक्षिक कार्यक्रमों की श्रृंखला विद्यार्थियों/शोधर्थियों/जिज्ञासुओं के लिए अत्यन्त ज्ञान वर्धक, रोचक एवं लाभकारी हैं। बौद्ध संग्रहालय द्वारा भारतीय संस्कृति की समृद्ध परम्परा को युवा पीढ़ी तक पहॅुचाने का अत्यन्त सराहनीय एवं महत्वपूर्ण कार्य निरन्तर किया जा रहा है। 
 
 सम्पूर्ति सत्र से पूर्व आज डाॅ0 संघर्ष राव, वैज्ञानिक एस0 डी0, रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन्स सेन्टर, विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी विभाग, उ0प्र0 द्वारा ’’डिजिटल हेरिटेज मिशन-स्मार्ट संग्रहालयों और भारतीय ज्ञान प्रणाली के प्रसार हेतु LiDAR और GIS का उपयोग’’ विषयक विस्तृत सूचनाओं से प्रतिभागियों को परिचित कराया गया। तत्पश्चात श्री अशोक कुमार उपाध्याय, वरिष्ठ विरासत संरक्षक, लखनऊ द्वारा पाण्डुलिपियों के क्षरण के कारण तथा पाण्डुलिपियों का प्राथमिक उपचार से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। श्री उपाध्याय द्वारा पाण्डुलिपियों के संरक्षण हेतु आवश्यक औषधियों का भी प्रदर्शन किया गया। 
 
सम्पूर्ति सत्र में महापौर द्वारा संगोष्ठी के मुख्य वक्ताओं/प्रशिक्षकों सहित लगभग 130 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये। कार्यशाला का प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले प्रतिभागियो में प्रमुख रूप से 12 जनपदों संत कबीरनगर, गोरखपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, बस्ती, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, जौनपुर, एवं वाराणसी का प्रतिनिधित्व प्रधानता से रहा। साथ ही बिहार एवं उत्तराखण्ड के प्रतिभागियों को भी प्रमाण-पत्र दिये गये। कार्यशाला में गणित, भूगोल, जीवविज्ञान, शिक्षा शास्त्र, इतिहास, पुरातत्व, विषय के प्रतिभागी एवं शिक्षक सम्मिलित रहे। संग्रहालय द्वारा संगोष्ठी के समापन अवसर पर प्रतिभागियों सेे फीडबैक प्राप्त करते हुए उनसे कार्यशाला से सम्बन्धित अनुभव भी साझा किये गये।
 
 डाॅ0 यशवंत सिंह राठौर, उप निदेशक, राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी की रिपार्ट प्रस्तुत करते हुए अवगत कराया कि उक्त कार्यशाला में 19-20 मार्च, 2026 को विभिन्न सत्रों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड एवं बिहार के लगभग 150 प्रतिगियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। दोनों दिवसों में 05 तकनीकि सत्र सम्पन्न हुए जिसमें 08 मुख्य वक्तव्यों के प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अत्यन्त महत्वपूर्ण ज्ञानवर्द्धक सूचनाओं को प्रतिभागियों के साथ साझा किया गया। साथ ही प्रतिभागियों की हमारी संस्कृति के प्रति उत्पन्न हुई जिज्ञासाओं को शांत करने का भी महत्वपूर्ण कार्य कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में विद्वानों द्वारा किया गया।
 
सम्पूर्ति सत्र में प्रमाण-पत्र वितरण के समय डाॅ0 देव प्रकाश शर्मा एवं तारामण्डल गोरखपुर के कर्मचारियों की भी उपस्थिति रही।
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