आम के बौर, फूल एवं फलों को झड़ने से बचाये : डॉ रजनीश
गर्मी के आगमन के साथ ही आम के बागों में बौर की महक फैलने लगती है। किसान बौर देखकर उत्साहित होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बौर आना अच्छी पैदावार की गारंटी नहीं है। यदि समय पर कीट और रोग प्रबंधन नहीं किया गया तो फूल और छोटे फल झड़ सकते हैं, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ रजनीश श्रीवास्तव ने इस विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि आम में फल झड़ने की समस्या अक्सर देखने को मिलती है। कई बार अच्छा बौर आने के बावजूद पेड़ों पर पर्याप्त फल नहीं बन पाते। इसका कारण पेड़ों के आंतरिक कारक जैसे हार्मोन असंतुलन और पोषक तत्वों की कमी के साथ-साथ बाहरी कारक जैसे मौसम में बदलाव, नमी की कमी या अधिकता, कीट एवं रोग होते हैं।
रस चूसने वाले कीटों से सावधान-
बौर निकलते ही भुनगा (हॉपर), गुजिया (मिली बग) और पुष्पगुच्छ मिज जैसे कीट सक्रिय हो जाते हैं। इनके शिशु और प्रौढ़ अवस्था के कीट कोमल पत्तियों, बौर, फूल और छोटे फलों का रस चूसते हैं, जिससे वे सूखकर गिर जाते हैं। इनके प्रकोप से पत्तियों पर चिपचिपा पदार्थ जम जाता है और काली फफूंदी विकसित हो जाती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है।
नियंत्रण के उपाय:
• जब 80–90 प्रतिशत बौर निकल आएं और फूल न खिले हों, तब क्विनालफॉस/ट्रायजोफॉस/मोनोक्रोटोफॉस 2 मिलीलीटर या प्रोफेनोफॉस 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
• फल मटर के दाने के आकार के होने पर इमिडाक्लोप्रिड या एसीटामिप्रिड 0.3–0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
• आवश्यकता पड़ने पर कार्बारिल 4 ग्राम प्रति लीटर पानी का प्रयोग किया जा सकता है।
प्रमुख रोग और उनका प्रबंधन-
आम में खर्रा (पाउडरी मिल्ड्यू), एन्थ्रेक्नोज और काली फफूंदी प्रमुख रोग हैं। खर्रा रोग में फूल, छोटे फल और पत्तियों पर सफेद चूर्ण दिखाई देता है, जबकि एन्थ्रेक्नोज में प्रभावित भाग सूखकर गिर जाते हैं।
रोग नियंत्रण के लिए:
• घुलनशील सल्फर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
• डाइनोकैप (कराथेन) या ट्राइडेमेफॉन (बेलेटान) 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करें।
• आवश्यकता होने पर कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।
विशेषज्ञों की सलाह है कि फूल खिलने के समय कोई छिड़काव न करें और घोल तैयार करते समय चिपकने वाला पदार्थ अवश्य मिलाएं।
फल झड़ने से बचाव और पोषण प्रबंधन-
मटर के दाने के आकार के फल होने पर एनएए (नेफ्थलीन एसीटिक एसिड) 20 पीपीएम या प्लैनोफिक्स 1 मिलीलीटर प्रति 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से फल झड़ना कम होता है।
फल वृद्धि के दौरान पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) का 0.5 प्रतिशत घोल तथा सूक्ष्म तत्वों (बोरॉन, जिंक, कॉपर और आयरन) का 0.5 प्रतिशत मिश्रण छिड़कने से फलों का विकास बेहतर होता है। साथ ही, बाग में उचित नमी बनाए रखना भी आवश्यक है।
समय पर वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान आम की फसल में होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
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