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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 21 Feb 2026 6:21 PM |   50 views

आधुनिक भोजपुरी साहित्य के इतिहास

आजु अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पऽ हम चर्चा करत बानी २०२६ में आचार्य शुभ नारायण सिंह ‘शुभ’ कऽ ‘आधुनिक भोजपुरी साहित्य के इतिहास ‘ शिवालिक प्रकाशन, दिल्ली से आइल बा। ई ग्रंथ में चार खंड बा: पहिला- आदिकाल क-(सन् ६०० से १८०० ई० तक) दुसरा- मध्य काल (१८००-१९४७) तीसरा- वर्तमान काल (आजादी १९४७ ई०का बाद के कवि लेखक लोग आ कृति) चउथा- व्याकरण खंड।
 
एकर सशक्त भूमिका लिखले बाड़न प्रोफेसर डॉ. शंकर मुनि राय ‘गड़बड़’ जी। उन्हाके लिखले बानी कि “एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें भोजपुरी भाषा की प्राचीनता और आधुनिकता का समन्वित रूप वर्णित है।”
 
विमर्श में डॉ. जौहर शफियाबादी लिखले बानी” इतिहास लेखन के जवन कमी खटकत रहल हऽ ओहके शुभ जी खूब निष्ठापूर्वक संवार- सजा के परोसले फाड़ने, जवना के पढ़ला का बाद कवनो ईमानदार पाठक जरूर सराहना करी ।”
 
आपन बात में शुभ नारायण सिंह लिखले बानी”शोधपूर्ण आ पुष्ट प्रमाण सहित बिन्दुअन पर पुस्तक में हम तथ्य परोसले बानीं,जवना के प्रमाणिकता में कवनो संदेह के गुंजाइश नइखे।”
एह ग्रंथ में पेज २४४ पऽ हमरियो चर्चा भईल बा।
 
एकहत्तर बरिस के अवकाश प्राप्त अध्यापक थावे आ मशरक के भोजपुरी रतन हईं, राउर आधा दर्जन किताब छपल बा जवने में ‘ भारतीय भाषा विज्ञान आ भोजपुरी ‘ एगो अउर सशक्त ग्रंथ बा।
 हमार मानल हमार कि भोजपुरी एगो स्वतः- स्फूर्त भाषा है जौने कऽ विकास पाली आ प्राकृत से भईल बा। विद्यापति, कबीर, नाथसिद्धन, अमीर खुसरो आ सूफियन से निकसल बहल एगो संपूर्ण सशक्त भाषा है। भोजपुरी कऽ उल्लेख पादरी केलाग ‘ए ग्रामर आफ द हिंदी लैंग्वेज ‘ में कईलें, फेलन भोजपुरी के ‘ए डिक्शनरी आफ हिंदुस्तानी प्रावर्ब्स ‘ में बतवलें, कुक के ‘ ट्राइब्स ऐंड कस्टम्स आफ नार्थ वेस्टर्न प्राविंस’, फ्रेजर के ‘ हिंदी फोक सांग्स’ , जान बिन्स के ‘ द नोट्स आन द भोजपुरी डायलेक्ट्स आफ हिंदी ऐंड स्पोकेन वेस्टर्न बिहारी ‘आ आर्चर के लेख में भी भोजपुरी लोकगीतन के संग्रह बा ।
 
भोजपुरी भाषा, साहित्य आ व्याकरण पऽ ग्रियर्सन, उदय नारायण तिवारी, कृष्णदेव उपाध्याय आ दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह के नांव लीहल जाला। ग्रियर्सन के शोध के आधार भोजपुरी साहित्य, लोककथा, लोकगीत, लोकनाटक आ सरकारी दस्तावेज रहल। ग्रियर्सन कऽ मुख्य आधार लोकगाथा बेसी रहल बा । इनकर भोजपुरी लोककथा के संग्रह देस परदेस में अंग्रेजी,जर्मन, फ्रेंच कई गो भासा में छपल।
 
उदय नारायण तिवारी के शोध के आधार भोजपुरिया लोग, उनकर साहित्य, सरकारी दस्तावेज, लोकगीत, लोककथा, लोकनाटक रहल। पंडित जी के भोजपुरी व्याकरण के वैज्ञानिक स्वरुप खातिर एह भोजपुरी के मूल में जा के साहित्य आ ओ जुग के भोजपुरियन के बोली, भोजपुरी लोककथा, लोकगीतन आ मुहावरा लोकोक्ति आदि के गहराई में उतरे के रहल। पंडित जी कऽ भोजपुरी व्याकरण आजुओ भोजपुरी के सर्वमान्य व्याकरण मानल जाला । कृष्णदेव उपाध्याय के शोध के आधार भोजपुरी लोकगीत रहल । इहां के भोजपुरी लोकगीतन के संग्रह खुद आ अउरी लोगन से करवा के ओहसे भोजपुरी भासा, साहित्य आ इतिहास के लेखन कईले बानी । 
 
दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह भोजपुरी लोकगीत, साहित्य, सरकारी कागजात आ लोककथा रहल।  
ग्रियर्सन के काम के आधार तऽ तिवारी जी, उपाध्याय जी आ दुर्गाशंकर सिंह के शोध में रहले बा, लोकगीतन में भोजपुरी के पारम्परिक गीत, संस्कार गीत, ऋतु गीत, श्रम गीत हर तरह के गीत बा । ई लोगवा भोजपुरी मुहावरा आ लोकोक्ति के बड़वर योगदान मनले बा आ ओह आधार प भोजपुरी भाषा, साहित्य आ व्याकरण पऽ लिखले बा ।  
 
जार्ज ग्रियर्सन के ‘ सम भोजपुरी फोक सांग्स ‘,’द पापुलर लिटरेचर आफ नार्दर्न इंडिया ‘,’लिंगुइस्टिक सर्वे आफ इंडिया’ (खंड ५ भाग २), ‘सेवेन ग्रामर आफ द डायलेक्ट्स ऐंड सबडायलेक्ट्स आफ द बिहारी लैंग्वेज ‘,’ ए कम्प्रेटिव डिक्शनरी आफ द बिहारी लैंग्वेज’, ‘ ए हैंडबुक टू द कैथी कैरेक्टर ‘; उदय नारायण तिवारी के ‘द ओरिजिन ऐंड डेवलपमेंट आफ़ भोजपुरी ‘ आ,’भोजपुरी भाषा और साहित्य ‘;डॉ. कृष्णदेव उपाध्याय के ‘भोजपुरी ग्राम गीत ‘ (भाग-1आ भाग- 2), ‘भोजपुरी लोक-संस्कृति’ आ
 
‘भोजपुरी साहित्य का इतिहास ‘; दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह के ‘भोजपुरी के कवि और काव्य ‘ आ ‘भोजपुरी लोकगीतो में करुण रस ‘ एहमे से कई गो किताब भोजपुरी में नइखे, हिंदी आ अंग्रेजी में बाड़ी सऽ । ‘ उत्तर प्रदेश के लोकगीत ‘,’ भोजपुरी संस्कार गीत ‘, ‘ भोजपुरी लोकोक्तियां और मुहावरे ‘,’ भोजपुरी मुहावरा संग्रह ‘,’ भोजपुरी पहेलियां ‘ भी मील के पाथर बनल। डॉ. शुकदेव सिंह के ‘ भोजपुरी और हिंदी के तुलनात्मक व्याकरण ‘, निर्भीक जी के ‘ भोजपुरी शब्दानुशासन ‘, शिवदास जी के ‘ भोजपुरी ठेठ भाषा व्याकरण ‘, गणेश चौबे के ‘ भोजपुरी प्रकाशन के सई बरिस ‘ आंख खोलईया रहल। रासबिहारी पांडे जी ‘ भोजपुरी भाषा का इतिहास ‘ लिखनी, उन्हा के पत्रिका के संपादक मंडल में हमहू रहल बानी।
लोकगीतन के गहिर शोध आ अध्ययन के बाद युनेस्को धरोहर बनवलस।
 
डॉ कुबेर मिश्र के शोध ग्रंथ में दन्त कथा आ ऐतिहासिक तथ्यन के जानकारी बा। एह शोध में ओह समय के भोजपुरी गीतन के संग्रह बा जब मॉरिसस के भोजपुरी पऽ हिंदी आ क्रियोल के ओतना प्रभाव ना पड़ल रहे। भोजपुरिया मूल के कई देसन में हम बहुत बेरा गईलीं। औरियो देसन में खासकर मारीशस, सुरीनाम, ट्रिनिडाड टुबैगो, फीजी, गुयाना, अफ्रीका में भी भोजपुरी भाषा साहित्य संस्कृति पऽ लिखल गईल जइसे राजेन्द्र मेस्थरी (साउथ अफ्रीका) दक्षिण अफ्रीका में भोजपुरी भाषा का इतिहास,बी. रामबिलास, नैताली दक्षिण अफ्रीकी ,शमीम ओज़ीरली, मारीशस भोजपुरी का विकास,
सुरेन्द्र गंभीर, गुयानी भोजपुरी, शालिग्राम शुक्ल, भोजपुरी व्याकरण, (वाशिंगटन), एम. थील हार्स्टमैन, छोटानागपुर में बोली जाने वाली भोजपुरी,राबर्ट एल. ट्रैमेल, भोजपुरी की उत्तरी मानक बोली,सरिता बुधू, मारीशस में भोजपुरी परंपराएं।सरनामी हिंदुस्तानी,कैरेबियन हिंदुस्तानी,
नैताली, मारीशियन भोजपुरी, नागपुरी में पहिले बहुत लिखाइल बा।
 
हमरे जवार के भाई अर्जुन तिवारी भी एगो ‘ भोजपुरी साहित्य का इतिहास ‘ लिखलें, डॉ. रविकांत ‘रवि’ के ‘ संक्षिप्त भोजपुरी ज्ञान – दर्पण ‘ भी छपल। हमार प्रिय डॉ. जीतेन्द्र वर्मा ‘ आधुनिक भोजपुरी व्याकरण ‘ लिखलें। श्रुति पांडे कऽ भोजपुरी और बांग्ला का तुलनात्मक अध्ययन, गोपाल ठाकुर कऽ भोजपुरी का व्याकरण ‘ भी आइल। भोजपुरी भाषा के प्रकृति आ प्रवृत्ति के अनुसार सहज तरीका से बुझे खातिर आ सवाल-जवाब जरिए दुविधा दूर करे खातिर नेपाल के गोपाल अश्क कऽ ‘प्रयोगात्मक भोजपुरी व्याकरण’ सर्व भाषा ट्रस्ट से प्रकाशित भइल बा। 
 
आचार्य शुभ नारायण सिंह ‘शुभ’ जी के विशाल ग्रंथ के खास चर्चा आजु एहसे करत बानी कि आजु जब अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा भाषा दिवस मनावल जा रहल बा आ देस बिदेस में फईलल पच्चीस करोड़ भोजपुरियन के महतारी भासा के संविधान के आठवां सूची में मान्यता के खातिर सभे जोरदार प्रयास करत बा तऽ अइसे में ई वृहद ग्रंथ एगो उजियार मिनार हऽ।
 
—– भाषाविद डॉ लारी आज़ाद 
 
 
 
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