वाराणसी में 5 सरकारी और 2 निजी क्रूज संचालित
लखनऊ-पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद में वाराणसी की गंगा नदी पर संचालित सरकारी और निजी क्रूजों को लेकर उठे सवालों का विस्तार से जवाब देते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और तथ्यों की अनदेखी कर प्रश्न उठाना उचित नहीं है।दरअसल, समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा ने वाराणसी में गंगा नदी पर चल रहे सरकारी व प्राइवेट क्रूजों की संख्या, उनके संचालन के मानक तथा संबंधित विवरण सदन की मेज पर रखने की मांग की थी। मंत्री ने न केवल विस्तृत उत्तर दिया, बल्कि विपक्ष पर पर्याप्त जानकारी के अभाव में सवाल खड़े करने का आरोप भी लगाया।
सदस्य ने पूछा कि जनपद वाराणसी में कितने सरकारी और निजी क्रूज संचालित हो रहे हैं, उनके संचालन के मानक क्या हैं और क्या इसका विवरण सदन के पटल पर रखा जाएगा? इसके जवाब में मंत्री ने स्पष्ट किया कि वाराणसी में 05 सरकारी और 02 निजी क्रूज संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इनके संचालन के मानक भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण तथा उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा निर्धारित किए गए हैं, जिनका पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक विवरण उपलब्ध है और जानकारी साझा करने में कोई आपत्ति नहीं है।
जानकारी पढ़ लेते तो सवाल न करते-
चर्चा के दौरान आशुतोष सिन्हा ने उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की स्थिति पर अतिरिक्त जानकारी मांगी। मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 6 दिसंबर 2023 को अधिसूचना जारी कर उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण का विधेयक पारित किया गया, जिसमें परिवहन विभाग को नोडल बनाया गया। इसके बाद 6 दिसंबर 2024 से अग्रिम कार्यवाही शुरू कर दी गई।
’पर्यटन आंकड़ों के जरिए साधा सियासी निशाना-
मंत्री ने विपक्ष को घेरते हुए पर्यटन के आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले पिछली सरकार के कार्यकाल में वाराणसी में 5 लाख 44 हजार 355 भारतीय और 3 लाख 34 हजार 860 विदेशी पर्यटक आए थे, जबकि वर्तमान समय में यह संख्या बढ़कर 17 करोड़ 27 लाख 52 हजार 631 से अधिक हो चुकी है। उन्होंने इस वृद्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को दिया। मंत्री ने कहा कि उनके मार्गदर्शन में न सिर्फ वाराणसी बल्कि पूरे प्रदेश के आध्यात्मिक और धार्मिक नगर पर्यटन के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं।
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