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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 6 Jan 2026 7:57 PM |   98 views

फर्जी डिग्रियों के चलते जे.एस. विश्वविद्यालय पर गिरी गाज, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा संभालेगा अभिलेख

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण एवं दूरगामी प्रभाव वाले प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। योगी कैबिनेट ने जहां जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद (जनपद फिरोजाबाद) के परिसमापन को मंजूरी दी, वहीं आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा स्थित ऑफ-कैंपस को संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृत किया।
 
कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि योगी सरकार ने भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद के परिसमापन का निर्णय लिया है।
 
जांच में यह तथ्य सामने आया कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम की फर्जी एवं बैक डेट में मार्कशीट और डिग्रियां जारी की गईं, जिनका उपयोग राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में चयनित अभ्यर्थियों द्वारा किया गया।
 
उन्होंने बताया कि राजस्थान पुलिस की जांच, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं कुलसचिव की गिरफ्तारी तथा शासन स्तर पर गठित जांच समितियों की आख्या में गंभीर अनियमितताएं प्रमाणित हुईं। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालय द्वारा उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन किया गया, जिसमें डिग्री प्रदान करने की शक्ति का दुरुपयोग, संगठित रूप से फर्जी अंकतालिकाओं एवं डिग्रियों का वितरण, निर्धारित भूमि मानकों का पालन न करना तथा उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को अनिवार्य सूचनाएं उपलब्ध न कराना शामिल है।
 
इन सभी तथ्यों के दृष्टिगत योगी सरकार ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद के परिसमापन का निर्णय लिया है। परिसमापन के उपरांत विश्वविद्यालय के समस्त अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे तथा उन्हीं अभिलेखों के आधार पर जेएस विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में निर्गत मार्कशीट एवं डिग्रियों का प्रमाणीकरण किया जाएगा।
 
साथ ही परिसमापन अवधि के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों के संचालन हेतु धारा 55(6) के अंतर्गत त्रि-सदस्यीय अंतरिम समिति गठित किए जाने का भी निर्णय लिया गया है। उल्लेखनीय है कि जेएस विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2015 में हुई थी।
 
कैबिनेट बैठक में दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा स्थित ऑफ-कैंपस की स्थापना से संबंधित रहा। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 एवं उसके द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2021 के अंतर्गत परिसर दूरस्थ केंद्र की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
 
इसी क्रम में प्रायोजक संस्था एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मेरठ द्वारा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 4.796 एकड़ भूमि चिन्हित की गई थी, जिसके लिए 25 फरवरी 2025 को आशय पत्र (एलओआई) निर्गत किया गया था।
 
अब योगी सरकार द्वारा आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा स्थित ऑफ-कैंपस के संचालन हेतु प्रायोजक संस्था को संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार होगा और विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी।
 
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि योगी सरकार प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई और शिक्षा के विस्तार के लिए आवश्यक निर्णय लगातार लिए जा रहे हैं।
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