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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 30 Nov 2025 7:20 PM |   34 views

न्यूनतम वेतन सभी क्षेत्रों पर लागू, वेतन भुगतान दो दिन में अनिवार्य

लखनऊ: लोक भवन स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि भारत सरकार द्वारा 29 पुराने श्रम अधिनियमों को एकीकृत करते हुए मजदूरी संहिता 2019, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 तथा उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता 2020 को लागू कर दिया गया है।
 
उन्होंने कहा कि यह सुधार देश की श्रम व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाते हुए श्रमिकों को सुरक्षा, सम्मान और समयबद्ध सेवाएँ उपलब्ध कराएंगे। नई संहिताएं 21 नवम्बर 2025 से पूरे देश में प्रभावी हो चुकी हैं।
 
मंत्री राजभर ने बताया कि इन सुधारों से श्रम कानूनों की जटिलता में ऐतिहासिक रूप से कमी आई है। पहले जहाँ 1228 धाराएँ थीं, अब उनकी संख्या घटाकर 480 की गई है। 1436 नियमों के स्थान पर केवल 351 नियम लागू किए गए हैं। 84 रजिस्टरों की जगह मात्र 8 रजिस्टर और 31 रिटर्न के स्थान पर एकल रिटर्न की व्यवस्था कर दी गई है। इससे नियोक्ताओं का अनुपालन बोझ कम होगा और श्रमिकों के हितों का संरक्षण अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि ये संहिताएँ युवाओं, महिलाओं, गिग वर्कर्स और सभी श्रमिकों के जीवन में स्थिरता व सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी और आर्थिक वृद्धि को नई गति देंगी।
 
उन्होंने बताया कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निरीक्षण व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है। रैंडमाइज्ड निरीक्षण प्रणाली से अब इंस्पेक्टर राज की अवधारणा समाप्त होगी और निरीक्षक की भूमिका सुविधा प्रदाता के रूप में विकसित होगी। किसी भी प्रथम उल्लंघन की स्थिति में नियोक्ता अधिकतम जुर्माने के 50 प्रतिशत का भुगतान कर उपशमन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे अनावश्यक अभियोजन नहीं होगा। इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा और उद्योगों को अनावश्यक विवादों से राहत मिलेगी।
 
मजदूरी संहिता की चर्चा करते हुए मंत्री राजभर ने कहा कि वेतन की परिभाषा को एकीकृत किया गया है और न्यूनतम वेतन अब सभी संगठित और असंगठित क्षेत्रों पर लागू होगा। वेतन भुगतान की समय-सीमा को अनिवार्य किया गया है और सेवा समाप्ति या त्यागपत्र की स्थिति में दो दिनों के भीतर सभी देयक का भुगतान सुनिश्चित किया गया है। ओवरटाइम के लिए दोगुने वेतन का प्रावधान, वेतन से कटौती की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत, तथा सभी कर्मचारियों को वेज-स्लिप देना अब अनिवार्य किया गया है, जिससे वेतन व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी बनेगी।
 
सामाजिक सुरक्षा संहिता की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को वैधानिक रूप से परिभाषित कर सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। इनके कल्याण के लिए कोष का निर्माण किया जाएगा, जिसमें सरकार के साथ एग्रीगेटर्स भी अपने टर्नओवर का 1/2 प्रतिशत योगदान करेंगे। फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के समान लाभ तथा एक वर्ष की सेवा पर ग्रेच्युटी का अधिकार मिलेगा। श्रमजीवी पत्रकारों के लिए ग्रेच्युटी पात्रता अवधि पाँच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष की गई है। सामान्य नागरिकों को राहत देते हुए निजी आवास निर्माण सीमा को बढ़ाकर 50 लाख किया गया है।
 
औद्योगिक संबंध संहिता के बारे में मंत्री राजभर ने बताया कि इसमें तीन अधिनियमों को मिलाकर एक आधुनिक और स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है। 300 से अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में छंटनी या बंदी हेतु राज्य सरकार की अनुमति अनिवार्य होगी। सामूहिक अवकाश को भी हड़ताल की परिभाषा में शामिल कर दिया गया है और 14 दिन की पूर्व सूचना के बिना किसी भी प्रकार की हड़ताल, तालाबंदी या अवकाश प्रतिषिद्ध होगा। उद्योगों और श्रमिकों के बीच समन्वय बढ़ाने हेतु शिकायत परितोष समिति, वार्ताकारी परिषद तथा दो सदस्यीय औद्योगिक अधिकरण का गठन किया गया है।
 
उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता की चर्चा करते हुए मंत्री राजभर ने बताया कि 13 पुराने कानूनों को समाप्त कर एक व्यापक और एकीकृत ढांचा तैयार किया गया है। इसमें कारखाने, बागान, खदान, पत्रकारिता, भवन निर्माण तथा सेवा क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कार्य घंटों और कार्यस्थल की उपयुक्तता संबंधी सभी प्रावधानों को आधुनिक रूप में लागू किया गया है। सभी प्रतिष्ठानों को अपने श्रमिकों का वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण कराना और उसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है।
 
मंत्री राजभर ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय स्तर पर करियर केंद्र स्थापित करेगी, जहाँ रोजगार चाहने वाले युवाओं का डेटा संकलन, परामर्श, काउंसलिंग और रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे। सम्पूर्ण पंजीकरण, आवेदन और पत्राचारथ प्रक्रिया अब पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये सुधार उद्योगों के विकास, रोजगार विस्तार और श्रमिक कल्याण इन तीनों को एक साथ नई दिशा देंगे।
 
इस अवसर पर डॉ0एम0 के0 शन्मुगा सुंदरम, प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन, उत्तर प्रदेश कुणाल सिल्कू, विशेष सचिव, श्रम एवं सेवायोजन, उत्तर प्रदेश, संदीप गुप्ता, निदेशक बॉयलर, उत्तर प्रदेश, कल्पना श्रीवास्तव, अपर श्रम आयुक्त, लखनऊ क्षेत्र, शमीम अख्तर, उप श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश, पंकज राणा, उप श्रमायुक्त, उत्तर प्रदेश, अजय मिश्रा, उप श्रम आयुक्त, उत्तर प्रदेश आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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