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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 25 Oct 2025 6:24 PM |   435 views

आलू की खेती कैसे करें किसान 

आलू दैनिक आहार का एक अभिन्न हिस्सा है। पूरे वर्ष भर आलू की उपलब्धता रहती है। आलू से सब्जी, पकौड़े, समोसे, चिप्स, तथा ब्रत में फलाहार के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।। प्रति व्यक्ति आलू की उपलब्धता 16 किग्रा. प्रति वर्ष है जो निश्चित रूप से कम है। आलू की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिये इसके तकनीकी पहलू को समझना होगा।

प्रसार्ड ट्रस्ट मल्हनी देवरिया के निदेशक ,प्रोफेसर रवि प्रकाश मौर्य का कहना है, कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान काटने के बाद किसान माह दिसंबर तक आलू लगाते है। जिससे कीट ,बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, उपज पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। यदि आलू अक्टूबर तक लगा दिया जाय तो कीट/ बीमारियों का प्रकोप कम होता है, तथा उत्पादन भी अच्छा होता है।आलू की प्रमुख किस्मों में कुफरी अशोका, कुफरी चन्द्रमुखी, कु.सूर्या, 70-80 दिनों में तैयार हो जाती है।

उत्पादन क्षमता 250 से 300 कुन्टल प्रति हैक्टेयर है। कु.बहार, कु.पुखराज, कु.लालिमा,कु.अरुण, कु.गिरीराज, कु.कंचन, कु.पुष्कर ,कु. ज्योति 90-100 दिनों में तैयार हो जाती है। उत्पादन क्षमता 250-300 कु.प्रति हैक्टेयर है।,, कु. सतलुज, कु.आनंद,कु.सिन्दूरी,कु.चिप्सोना-1,2,3 ,आदि 110-120 दिनों की किस्में है। जिसका उत्पादन प्रति हैक्टेयर 350 से 400 कुन्टल है।आलू की खेती के लिए बलुई दोमट एवं दोमट मृदा सर्वोच्च होती है। प्रति हैक्टेयर में 30 से 35 कुन्टल कंन्द ( 35-40 या 40-50 ग्राम के कंन्द अथवा 3.5 से 4.0 से मी.आकर वाले कंन्द) प्रर्याप्त होते है।

पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60 सेमी. तथा कन्द से कन्द की दूरी बीज आलू के आकर के अनुसार 20-30 सेमी. पर रखा जाता है। आलू बुआई से पहले 250 कुन्टल गोबर की सड़ी खाद प्रति है. की दर से खेत में मिला दे। उर्वरक का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए।

150:80:100 नत्रजन, फास्फोरस, एवं पोटाश का प्रयोग प्रति है की दर से कर सकते है। इसकी पूर्ति के लिए 260 किग्रा यूरिया, 176 किग्रा डाईअमोनियम फास्फेट एवं 170 किग्रा म्यूरेट आफ पोटाश का प्रयोग करें। बुआई के समय नत्रजन की आधी मात्रा, फास्फोरस, एवं पोटाश की पूरी मात्रा का प्रयोग करें। नत्रजन की शेष मात्रा मिट्टी चढ़ाते समय 20-25 दिन बाद प्रयोग करना चाहिए।

आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिए। कीट/बीमारियों की निगरानी करना चाहिए। यदि आलू भण्डारण करना है तो परिपक्व होने पर ही खुदाई करें।

-प्रो. रवि प्रकाश

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