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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 16 Jun 2025 7:19 PM |   2147 views

भारत मे आम की प्रमुख किस्में

भारत विविध जलवायु और कृषि परंपराओं वाला देश है, जहाँ आम को “फलों का राजा” कहा जाता है। भारत में ही आम की लगभग 1,000 से अधिक देशज एवं उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिनमें से 30-40 प्रमुख किस्में वाणिज्यिक खेती और बाजार में प्रमुखता से उपयोग होती हैं। विविधता का यह खजाना भारत को वैश्विक आम उत्पादक देशों में अग्रणी बनाता है। 
 
आम की हजारों किस्मों में से चयन करते समय उद्देश्य के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है — चाहे वह निर्यात हो, प्रोसेसिंग उद्योग, या बाजार आपूर्ति का समय। यह लेख आम की प्रमुख किस्मों को उनके विशेष उपयोग जैसे निर्यात गुणवत्ता, प्रोसेसिंग उपयुक्तता और तुड़ाई अवधि या अन्य के आधार पर वर्गीकृत करता है जो मुख्यतः किसानों, उद्यान योजनाकारों, बागवानी छात्रों, बागवानों और एग्रो-टूरिज़्म विशेषज्ञों के लिए किस्म चयन में मार्गदर्शक का कार्य करेगा।
 
1.निर्यात के लिए उपयुक्त किस्में-
अल्फांसो (अंतरराष्ट्रीय माँग, अत्यंत सुगंधित, वेस्टर्न कोस्ट विशेषता)
सिंदूरी (आकर्षक रंग, अच्छी शेल्फ लाइफ)
टॉमी एटकिंस (इंटरनेशनल वैरायटी, हार्ड छिलका, ट्रांसपोर्ट उपयुक्त)
मियाज़ाकी (हाई वैल्यू जापानी किस्म)
केसर (सुगंधित, छोटा आकार, खाड़ी देशों में उच्च माँग)
पूसा अरुणिमा (IARI विकसित, सुंदर रंग, निर्यात हेतु उपयुक्त)
अरुणिका / अंबिका (हाई पल्प %, अच्छी दिखावट)
दशहरी (पतला बीज, स्वादिष्ट, पैकिंग के लिए उपयुक्त)
 
2. प्रोसेसिंग/पल्प इंडस्ट्री के लिए उपयुक्त-
फजली (बड़ा फल, रेशेदार पल्प, पन्ना/अचार हेतु उपयुक्त)
नूरजहां (विशाल आकार, गूदा अधिक)
दशहरी (स्वादिष्ट पल्प, स्क्वैश हेतु उपयुक्त)
मल्लिका (रसदार, स्मूथ टेक्सचर)
सुंदरजा (मधुर स्वाद, रस और सुगंध प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त)
लक्ष्मण भोग (रेशा रहित, पकने के बाद भी रंग व स्वाद में स्थिरता, पल्प उत्पादन में उपयुक्त)
रामकेला (अचार, चटनी, स्लाइसिंग के लिए श्रेष्ठ, विशेषकर पूर्वी भारत में लोकप्रिय)
तोतापुरी (अधिक रेशा युक्त, रसदार, स्लाइस और स्क्वैश हेतु उपयुक्त)
अर्का नीलांचल केसरी (प्रोसेसिंग के लिए सुंदर रंग, अच्छा गूदा, चटनी/स्क्वैश में उपयुक्त)
 
3.पकने की अवधि के अनुसार किस्में-
अगेती किस्में (अप्रैल से मई प्रारंभ)
पूसा सूर्या (अप्रैल अंत)
सिंधू (अप्रैल-मई)
अंबिका (मई की शुरुआत)
अरुणिका (मई पहला सप्ताह)
बॉम्बे ग्रीन (अप्रैल अंत से मई प्रारंभ)
अर्का नीलांचल केसरी (मई प्रारंभ)
 
मध्यम अवधि (मई मध्य से जून मध्य)-
केसर (मई तीसरा सप्ताह)
दशहरी (मई अंत से जून मध्य)
सुंदरजा (मई अंतिम सप्ताह)
अल्फांसो/हापुस (मई मध्य)
पूसा अरुणिमा (जून प्रथम सप्ताह)
टॉमी एटकिंस (जून प्रारंभ)
तोतापुरी (जून प्रारम्भ)
आम्रपाली (जून मध्य)
 
देर से पकने वाली (जून अंत से जुलाई)-
लंगड़ा (जून अंतिम सप्ताह)
मल्लिका (जुलाई मध्य तक)
फजली (जुलाई)
नूरजहाँ (जुलाई)
सिंदूरी (जून अंत)
गुलाबखास (जुलाई प्रथम सप्ताह)
 
4. GI टैग प्राप्त आम की किस्में-
अल्फांसो (कोंकण क्षेत्र, महाराष्ट्र)
दशहरी (मलिहाबाद, लखनऊ, उत्तर प्रदेश)
लंगड़ा (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
चौसा (हरदोई/लखनऊ, उत्तर प्रदेश)
केसर (जूनागढ़, गुजरात)
हिमसागर (मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल)
फज़ली (मालदा, पश्चिम बंगाल)
बानगनपल्ली (आंध्र प्रदेश)
तोतापुरी (कर्नाटक/आंध्र प्रदेश)
सिंदूरी (बिहार/झारखंड)
सुंदरजा (रीवा, मध्य प्रदेश)
गौरजीत (गोरखपुर, बस्ती -उत्तर प्रदेश)
जर्दालू (बिहार)
 
GI टैग वाली किस्मो से संबन्धित सामान्य सुझाव:
क्षेत्रीय अनुकूलता को प्राथमिकता दें– GI टैग किस्में सामान्यतः विशेष भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में उत्कृष्ट उत्पादन देती हैं।
 
मूल स्रोत से पौध सामग्री प्राप्त करें – प्रमाणित नर्सरी या संस्थान से ग्राफ्टेड पौधे अपनाएँ जिससे किस्म की शुद्धता बनी रहे।
 
भंडारण और पैकेजिंग की तैयारी करें – GI किस्में विपणन में ब्रांड वैल्यू रखती हैं, अतः उनका ग्रेडिंग, स्टोरेज व लेबलिंग उपयुक्त तरीके से किया जाना चाहिए।
 
स्थानिक नाम का सम्मान करें – GI टैग के तहत ब्रांड प्रमोशन में उस क्षेत्र का उल्लेख करना आवश्यक होता है, जिससे कानूनी और विपणन लाभ मिल सके।
 
5. लाल/बैगनी रंगीन आम की किस्में-
मियाजाकी
पूसा अरुणिमा
अरुणिका
अंबिका
पूसा सूर्या
पूसा लालिमा
वनराज
स्वर्णरेखा
सिंदूरी
गुलाबखास
सेंसेशन
टॉमी एटकिंस
अनारकली
 
6. अच्छी फ्रूटिंग और टेस्ट वाली किस्में-
गौरजीत
चौसा
दशहरी
लंगड़ा
सुंदरजा
केसर
मल्लिका
 
7. बड़े फल आकृति की किस्में-
फजली/मालदा
नूरजहां
बनाना
हाथीझूल
 
8. हर साल फलने वाली किस्में-
आम्रपाली
मल्लिका
पूसा अरुणिमा
अरुणिका
अंबिका
पूसा सूर्या
बारहमासी
 
9. छोटे/पतले बीज और अधिक गूदा वाली किस्में-
सिंधु 
दशहरी
 
10. किचन गार्डन या सीमित स्थान के लिए उपयुक्त मध्यम आकार के पेड़ वाली किस्में-
 
आम्रपाली
मल्लिका
नीलम
सिंधू
पूसा अरुणिमा
पूसा सूर्या
अरुनिका
अंबिका
सेंसेशन
 
आम की किस्मों की यह विविधता न केवल भारत की जलवायु और कृषि विविधता को दर्शाती है, बल्कि किसानों को बाजार, निर्यात, प्रोसेसिंग और उपभोग के अनुसार वैज्ञानिक किस्म चयन का अवसर भी देती है। उद्देश्य आधारित यह वर्गीकरण विभिन्न हितधारकों के लिए मार्गदर्शिका की तरह कार्य करेगा और आम उत्पादन की गुणवत्ता, विपणन योग्यता और आर्थिक लाभ को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होगा। GI टैग वाली किस्मों का विवेकपूर्ण और क्षेत्रीय समर्थन के साथ अपनाना किसानों के लिए दीर्घकालिक ब्रांड निर्माण और निर्यात संभावनाओं का द्वार खोल सकता है।
 
– डॉ. शुभम कुम़ार कुलश्रेष्ठ ,विभागाध्यक्ष -उद्यान विभाग,(कृषि संकाय),रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, ऱायसेन, मध्य प्रदेश|
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