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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 11 Mar 2024 6:23 PM |   348 views

अपने बल और ऊर्जा को सही दिशा में लगाना ही अनुशासन है- डॉ सौरभ

कुशीनगर -जिस व्यक्ति के जीवन की डोर अनुशासन से बधी होती वह जीवन में सफलता के शिखर पर पहुंचता है।मैने अनुशासन का पाठ अपने छात्र जीवन में एन एस एस के शिविर में सीखा।आप लोग इस शिविर में जो अनुशासन सीखेंगे वह जीवन के संघर्ष में आपका पथ आलोकित करता रहेगा।
 
उपरोक्त बातें राकेश जायसवाल ने शिविर के पांचवें दिन मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही।आपने बताया कि व्यहारिक जीवन में हम अनुशासन को बाधा मानते है लेकिन वास्तव में यह हमारी शक्ति है जो कार्य को पूर्ण करने में मदद करती है।
 
मुख्य वक्ता डॉ सौरभ द्विवेदी ने बताया कि अपने बल और ऊर्जा को सही दिशा में लगाना ही अनुशासन है।जीवन के सामान्य नियम ही अनुशासन है।आपने बताया कि कोई काम नियमित रूप से 30 दिन तक करे तो आपका मन मस्तिष्क खुद को उसके अनुरूप ढाल लेगा और 31 वे दिन वह कार्य आप खुद ब खुद उसी समय और नियम से करेगें। अगर व्यक्ति जीवन में समय का प्रबंधन कर लें उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।
 
विशिष्ट वक्ता डॉ पंकज दूबे ने कहा कि अनुशासन दो शब्दो से मिलकर बना है अनु और शासन। अनु का अर्थ है व्यवस्था या नियम।अर्थात शासन के नियम या व्यवस्था को अनुशासन कहते है।यह अनुशासन का संक्षिप्त अर्थ है जबकि अनुशासन से हमारे जीवन का प्रत्येक पक्ष अच्छादित है।आपने आप को संयमित करना ही अनुशासन है।आपने महान व्यक्तियों और खिलाड़ियों का उदाहरण देकर बताया कि किस प्रकार अनुशासन ने इनके व्यक्तित्व,खेल और जीवन को निखारा।
 
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ गौरव तिवारी ने कहा कि प्रकृति एक अनुशासन में चलती है। आपने कहानी सुनाते हुए कहा कि नदी जब अपना अनुशासन तोड़ देती है तब वह जीवनदायनी की जगह जीवनहरने वाली बन जाती है।इसी प्रकार हमारा जीवन है। जैसे ही हमारे जीवन का अनुशासन भंग होता है मुसीबते शुरू हो जाती हैं। आपने बताया कि आत्ममुग्धता एक बड़ी बीमारी है जो उदंडता के रूप में प्रकट होती है।इससे अनुशासन भंग की समस्या होती है।अक्सर हम लोग अपने को विशिष्ट दिखाने और प्रभाव जमाने के लिए नियम तोड़ते है।इसमें हमे संतुष्टि और क्षणिक आनंद मिलता है किंतु अंततः यह हमारे पतन का कारण बनती है।ज्ञान को प्राप्त करने का भी एक अनुशासन होता है।ज्ञान समय से पहले और कुपत्र को प्राप्त होता तो समस्या पैदा होती है।
 
कार्यक्रम का संचालन स्वयंसेविका सुजाता मिश्रा ने और आभार ज्ञापन कार्यक्रम अधिकारी डॉ जितेंद्र मिश्र ने किया। अतिथियों का परिचय एवम् स्वागत कार्यक्रम अधिकारी डॉ निगम मौर्य ने किया।
 
 
 
 
 
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