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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 3 Oct 3:10 PM

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का प्रसारण रोकने वाले अधिकारी पर गिरी गाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब से सत्ता में आए विपक्ष उनपर सबसे ज्यादा मीडिया की आवाज को दबाने का आरोप लगा रहा है। विपक्ष मोदी पर खुद को प्रचारित करने का भी आरोप लगा कर तंज कसता है। अब एक ऐसा मामला चेन्नई से आ रहा है जो विपक्ष को मोदी सरकार पर हमला करने का एक और बड़ा हथियार प्रदान कर सकता है। दरअसल, पीएम मोदी कुछ दिन पहले आईआईटी मद्रास के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए चेन्नई पहुंचे थे। उनका वहां पर भाषण भी हुआ। इसके अलावा उनके दो और संबोधन थे। लेकिन उनके संबोधन का कुछ हिस्सा डीडी पोडिगई पर प्रसारित नहीं किया गया। इस मामले को लेकर एक अधिकारी पर गाज गिरती नजर आ रही है। प्रसार भारती ने चेन्नई दूरदर्शन केंद्र की अधिकारी आर. वसुमति को “अनुशासनात्मक कार्यवाही” का हवाला देते हुए निलंबित कर दिया है|

अधिकारी के निलंबन को इस मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पती द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश में किसी कारण का उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि शीर्ष सूत्र इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। यह कहा जा रहा है कि पीएम मोदी के तीन अलग-अलग कार्यक्रम हुए और सभी कार्यक्रमों को प्रसारण करने के आदेश थे पर आर वसुमति ने स्वतंत्र रूप से निर्णय लिया कि वे उन्हें प्रसारित नहीं करेंगी। और इसलिए प्रसार भारती ने यह कार्रवाई की है। निलंबित अधिकारी ने अभी तक इस मामले में चुप्पी साध रखी है। बताया जा रहा है कि घटना से पहले निलंबित सहायक निदेशक ने अपने वरिष्ठों को एक ईमेल भेजा था जिसमें पूछा गया था कि क्या प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लाइव कवर किया जाना चाहिए। जिसके बाद यह साफ कहा गया था कि इसका सीधा प्रसारण किया जाना है।
स्पष्ट आदेशों के बावजूद सहायक निदेशक वसुमति ने पीएम मोदी के कार्यक्रम के एक भाग का प्रसारण नहीं करने का निर्णय लिया। सूत्रों का कहना है कि जब पीएम मोदी का भाषण चल रहा था, दूरदर्शन केंद्र पर तमिल गीतों और नाटक का प्रसारण हो रहा था। माना जा रहा है कि प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इस बात को ध्यान में रखते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा था। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को घटना के बारे में जांच करने को कहा गया था। कुछ डीडी पोडिगई अधिकारियों का कहना है कि उन्हें भाषण के लाइव टेलीकास्ट में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा क्योंकि उनकी टीम कार्यक्रम स्थल में प्रवेश नहीं कर सकी थी। अब यह मामला तुल पकड़ता नजर आ रहा है। उधर प्रसार भारती भी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। वसुमति के खिलाफ यह कार्रवाई 1965 के केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के तहत की गयी है। 
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