Sunday 20th of June 2021 04:00:03 AM

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Category: स्तंभ

30 May

पत्रकार भी है अग्रिम पंक्ति का योद्धा

पत्रकारिता दिवस पर प्रतिवर्ष पत्रकारों एवं पत्रकारिता की चर्चा होती है |सरकारे भी आतीं है और चली जाती हैं , पत्रकार की दशा और दिशा पर विचार विमर्श नहीं करती

4 Apr

कृषि सुरक्षा उपायों के साथ हम अगली पीढ़ी को क्या देकर जा रहे हैं?

अक्सर हम अपने बचपन को याद करते हैं, ये सोचते हुए के हम कितने स्वस्थ रहते थे हर चोट, फोड़े, फुंसी के बाद भी कैसे- कैसे खेल खेलते थे? मोबाइल

29 Mar

स्नेहिल, सुगंधित होली

होली हमारे समय को आल्हाद से भर देती है। अर्थात् यह नए  वातावरण का सृजन करती है- स्नेहिल, सुगंध व पुनर्नूतनता भरे । होली कहती है कि अभी और पुनर्नवीकरण

1 Feb

पूंजीवाद का उदय

जड़ वस्तु के पाने की सीमाहीन इक्षा ही पूंजीवाद को जन्म दिया है।जमीन जायदाद, रुपया पैसा ,धातु वाली, अधातु वाली, क्रय विक्रय की सामग्रियां, ये सब जड़ जागतीक धन-संपत्तियों के

2 Jan

नव वर्ष : जिजीविषा एवं लालित्य का समास

नववर्ष केवल नये समय का पर्व नहीं। वह जिजीविषा, सामूहिकता, वैभव, समृद्धि की कामना, संकल्प, नूतनता के उन्मेष का भी प्रकटीकरण है। विषाद की छाया के विरुद्ध नवता का उद्

3 Dec

समन्वित खेती

   युग द्रष्टा, युग स्रष्टा  प्रभात रंजन सरकार जी का कथन है: “Because food is the most essential commodity, agriculture is the most important part of the economy and should

7 Oct

न्याय, अस्तित्व और अस्मिता के लिए लड़ती नारी

‘हाथरस की निर्भया ने दम तोड़ दिया’. इस खबर ने मुझे न तो चौंकाया और न ही शांत रहने दिया क्योंकि हर रोज़ न जाने कितनी निर्भया इस पुरुष प्रधान

15 Aug

स्वतंत्रता दिवस

मानव स्वभाव है सुख की आकांक्षा | सुख सब लोग चाहतें हैं किन्तु सुख की खोज ही तो दुःख का कारण है |स्वतंत्रता प्राप्ति का इतिहास भी ऐसा ही है

4 Aug

हमारा समाज

हमारा मानव समाज विभिन्न प्रकार की समस्याओं से घिर गया है- चाहे वह समस्या बेरोजगारी की हो, या गरीबी की, या नैतिक पतन की, या सांस्कृतिक विकृति की, या सामाजिक

4 Aug

हमारा समाज

हमारा मानव समाज विभिन्न प्रकार की समस्याओं से घिर गया है- चाहे वह समस्या बेरोजगारी की हो, या गरीबी की, या नैतिक पतन की, या सांस्कृतिक विकृति की, या सामाजिक